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शनिवार, 13 मार्च 2010

उत्पीड़न से कम उम्र में 'बुढ़ापा'






शोध ने बच्चों की कोशिकीय संरचना का अध्ययन किया


अमरीका मे हुए एक शोध में पता चला है कि वे लोग जो बचपन मे उत्पीड़न का शिकार हुए है उन पर उम्र की छाप जल्दी चढ़ती है.



इस शोध से पता चला है कि जो लोग कम उम्र मे मानसिक उत्पीडन का शिकार होते है उनकी कोशिकीय संरचना मे बदलाव आता है.



बीबीसी संवाददाता जैक इज़्ज़ार्ड का कहना है कि डॉक्टरों को ये लंबे अरसे से पता था जिन लोगों का बचपन किसी भी तरह के उत्पीड़न के साए में बीता है, वे गंभीर भावनात्मक नुक़सान से जूझते हैं.



लेकिन इस नए शोध से एक नई और आश्चर्यजनक बात पता चली है. और वो ये कि इस परिस्थिति में उनकी कोशिकाएँ जल्दी बूढ़ी हो जाती हैं.




ब्राउन विश्वविद्यालय मे काम कर रहे शोधकर्ताओं का ये शोध व्यक्ति के डीएनए अणु पर आधारित है. इस डीएनए अणु का नाम है टिलोमीयर्स है जो हमारे क्रोमोज़ोम यानी गुणसूत्र के अंतिम छोरों को बांधे रखते हैं.

वैज्ञानिक इसकी तुलना जूते के फीतों के किनारे पर लगे प्लासिटक के छोटे टुकड़ों से करते हैं जो उनको खुलने से रोकता है.

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढती है, टिलोमीयर्स छोटे होते जाते है और हमारी कोशिकाएँ मरती जाती हैं.


शोध
पहले के शोध से ये पता चलता था कि इस तरह से उम्र बढने की प्रक्रिया सिगरेट पीने या फिर विकिरण के कारण होती थी लेकिन अब इस शोध ने एक नई बात सामने रखी है.



शोध से पता चला है कि ज़िंदगी के शुरुआती दिनों में अगर किसी तरह का मानिसक उत्पीड़न हुआ है तो उसका प्रभाव भी लगभग वैसा ही होता है.



उन वयस्कों मे टिलोमीयर्स जल्दी छोटे हो गए जिनका बचपन खुशहाल नहीं बीता.

हालांकि इस शोध के पूरे प्रभाव पर अभी जानकारी नहीं मिली है और कुछ कोशिकीय जैव वैज्ञानिकों ने भी आगाह किया है कि ये शोध बहुत कम लोगों पर किया गया है इसीलिए परिणामों पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता है.



लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि जिन लोगों का बचपन कठिन परिस्थितियों में गुज़रा, उनके लिए परेशानी आगे भी खड़ी मिलती है.

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2009

देश के हर नागरिक को पेंशन मिलेगी




Feb 19, 09:36 pm

पेंशन क्षेत्र की नियामक एजेंसी-पेंशन फंड नियामक विकास प्राधिकरण [पीएफआरडीए] की यह योजना सफल रही तो देश के हर नागरिक को पेंशन मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। कोई संगठित क्षेत्र में काम करे या असंगठित क्षेत्र में, वह पेंशन पाने का हकदार होगा। पीएफआरडीए ने इस योजना को अमली जामा पहनाने का काम शुरू कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण को अगले वित्त वर्ष 2009-10 की शुरुआत से लागू किया जाएगा। इस बात की जानकारी पीएफआरडीए की अधिशासी निदेशक मीना चतुर्वेदी ने गुरुवार को यहां एसोचैम की तरफ से आयोजित एक सेमिनार में दी।


चतुर्वेदी ने बताया कि इस योजना को एक अप्रैल, 2009 से लागू करने की तैयारी है। पहले चरण में लगभग 8 करोड़ लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इसमें असंगठित क्षेत्र के मजदूर भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पेंशन देने के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से 1800 करोड़ रुपये भी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि पेंशन फंड के प्रबंधन के लिए पीएफआरडीए ने छह प्रबंधकों की नियुक्ति की है। इसके अलावा 23 अन्य एजेंसियों की नियुक्ति की जानी है, ताकि पेंशन योजनाओं को दूरदराज के इलाकों में और समाज के निचले तबके तक पहुंचाया जा सके।

देश की 87 फीसदी आबादी को अभी भी पेंशन की कोई सुविधा नहीं है। प्राधिकरण इस बात के लिए प्रयास करेगा कि आम आदमी में पेंशन को लेकर जागरूकता पैदा हो। चतुर्वेदी के मुताबिक इसके लिए विशेष अभियान शुरू किया जाएगा, ताकि हर नागरिक और असंगठित क्षेत्र के हर एक श्रमिक को पेंशन की सुविधा मिल सके। पूरी स्थिति पर कड़ाई से नजर रखी जाएगी ताकि कोई गड़बड़ी न हो। इसके लिए पीएफआरडीए शीघ्र ही विस्तृत दिशानिर्देश लागू करने वाला है।


उधर, सेमिनार में बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण [इरडा] के सदस्य [एक्चुअरी] आर. कानन ने भी कहा है कि पेंशन फंड प्रबंधकों को अपने कामकाज को लेकर काफी सावधानी बरतनी होगी। उन्हें हर तीन महीने पर अपनी बैलेंस शीट सार्वजनिक करनी होगी। इरडा दरअसल, सत्यम कंप्यूटर्स कांड के बाद कोई जोखिम नहीं लेना चाहता है, इसलिए वह पहले से ही सख्त प्रावधान लाना चाहता है। कानन ने धमकी भरे स्वर में कहा भी कि अगर किसी निजी पेंशन फंड प्रबंधक ने कोई गड़बड़ी की तो उसका विलय सरकारी क्षेत्र के फंड प्रबंधक के साथ कर दिया जाएगा।

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]।

गुरुवार, 18 दिसंबर 2008

वृद्धों के लिए राष्ट्रीय नीति

नीतियाँ और योजनाएँ



कुछ वर्षों से सरकार ने वृद्ध व्‍यक्तियों के लिए कई योजनाएं और नीतियां शुरू की हैं। इन योजनाओं और नीतियों का प्रयोजन देश के वरिष्‍ठ नागरिकों की आरोग्‍यता, कल्‍याण और आत्‍म-निर्भरता को बढ़ावा देना है। ऐसे कुछ कार्यक्रमों का उल्‍लेख नीचे किया गया है।

केंद्र सरकार ने भारत में वरिष्‍ठ नागरिकों के आरोग्‍यता और कल्‍याण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1999 में वृद्ध सदस्‍यों के लिए राष्‍ट्रीय नीति तैयार की है। इस नीति का उद्देश्‍य व्‍यक्तियों को स्‍वयं के लिए तथा उनके पति या पत्‍नी के बुढ़ापे के लिए व्‍यवस्‍था करने के लिए प्रोत्‍साहित करना है इसमें परिवारों को अपने परिवार के वृद्ध सदस्‍यों की देखभाल करने के लिए प्रोत्‍साहित करने का भी प्रयास किया जाता है। यह नीति स्‍वैच्छिक एवं गैर-सरकारी संगठनों को परिवार द्वारा की जा रही देखभाल की अनुपूर्ति करने और असुरक्षित वृद्ध व्‍यक्तियों की देखभाल और सुरक्षा की व्‍यवस्‍था करने में मदद करती है। इस नीति के तहत स्‍वास्‍थ्‍य देख-रेख, अनुसंधान जागरूकता लाने और वृद्ध व्‍यक्तियों की देख-रेख करने वालों के लिए प्रशिक्षण सुविधाओं का भी उल्‍लेख किया गया है। इस नीति का मुख्‍य उद्देश्‍य वृद्ध व्‍यक्तियों को पूरी तरह से आत्‍म-निर्भर नागरिक बनाना है।

इस नीति के कारण कई योजनाएं शुरू की गई हैं जैसे कि –

1. प्राथमिक देख-रेख प्रणाली को सुदृढ़ बनाना, जिससे वे वृद्ध व्‍यक्तियों की स्‍वास्‍थ्‍य रक्षा की जरुरतों को पूरा कर सकें।
2. वृद्ध व्‍यक्तियों की स्‍वास्‍थ्‍य रक्षा के संबंध में चिकित्‍सा और सहायक चिकित्‍सा कार्मिकों को प्रशिक्षण तथा परिचय
3. स्‍वस्‍थ रहते हुए बुढ़ापे की ओर बढ़ने की धारणा को बढ़ावा देना
4. वृद्ध-चिकित्‍सा संबंधी सामग्री के उत्‍पादन और विवरण के लिए समितियों को सहायता.
5. अस्‍पतालों में वृद्ध रोगियों के लिए पृथक लाइनों और शैया के आरक्षण की व्‍यवस्‍था
6. अंत्‍योदय योजना के तहत अधिक से अधिक लोगों को शामिल करना और इस बात पर जोर देना कि वृद्ध व्‍यक्तियों, खासकर जो विस्‍थापित हैं, कमजोर वर्गों से संबंध रखते हैं, के कल्‍याण के लिए सस्‍ती दरों पर भोजन की व्‍यवस्‍था करना।

वृद्ध व्‍यक्तियों के लिए समेकित कार्यक्रम एक ऐसी योजना है जिसमें 31 मार्च, 2007 की स्थिति के अनुसार गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को परियोजना लागत की 90 प्रतिशत तक की राशि की वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि वृद्धाश्रम, दिवस देखभाल केंद्र, चलते-फिरते चिकित्‍सा यूनिट स्‍थापित करने और उनकी रखरखाव करने और वृद्ध व्‍यक्तियों की अन्‍य जरुरतों जैसे कि परिवार को प्रबलित और सुदृढ़ बनाना, संबंधित मुद्दों पर जागरूकता लाना और बुढ़ापे को खुशहाल बनाना आदि को पूरा करने के लिए भी कार्य करती है।

सरकार का अन्‍य कार्यक्रम पंचायती राज संस्‍थाओं स्‍वैच्छिक संगठनों और स्‍व-सहायता समूहों की वृद्धाश्रमों और वृद्ध व्‍यक्तियों के लिए बहु सेवा केंद्रों के निर्माण के लिए सहायता प्रदान करने की योजना है। इस योजना में निर्माण के लिए एक बारगी अनुदान प्रदान किया जाता है।

केंद्रीय सरकार स्‍वास्‍थ्‍य योजना केंद्रीय सरकार के कार्यालयों के पेंशनभोगियों को पुरानी बीमारियों के लिए लगातार तीन महीने तक इलाज करने की सुविधा प्रदान करती हैं। अधिक जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें।

राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम में एल्‍जाइमर और अन्‍य विक्षिप्तियों, पार्किन्‍सन रोग, अवसाद और वृद्धावस्‍था मनोविकार रोग से ग्रस्‍त वरिष्‍ठ नागरिकों की जरुरतों पर ध्‍यान दिया जाता है।

नई योजनाएं

जी हां, वित्‍तीय सुरक्षा की यात्रा यहीं समाप्‍त नहीं हो जाती। केंद्र सरकार वरिष्‍ठ नागरिकों के हित के लिए और नई-नई योजनाएं और स्‍कीमें बना रही है। वर्ष 2007-08 के बजट, में वित्‍त मंत्री ने वरिष्‍ठ नागरिकों को मासिक आय प्रदान करने और नई स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजनाएं विकसित करने का प्रस्‍ताव किया है।

वरिष्‍ठ नागरिकों के हित के लिए यह प्रस्‍ताव किया गया है कि –

* राष्‍ट्रीय आवास बैंक एक 'प्रत्‍यावर्ती गिरवी (रिवर्स मार्टगेज) योजना शुरू करेगा जिसके तहत वह वरिष्‍ठ नागरिक जिसके पास अपना मकान है, मकान को गिरवी रखकर मासिक आय प्राप्‍त कर सकता है। वह वरिष्‍ठ नागरिक उस मकान का स्‍वामी बना रहेगा और ऋण का भुगतान अथवा शोधन किए बिना जीवन भर मकान उसके ही कब्‍जे में रहेगा। गिरवी गारंटी कंपनियों के सृजन की मंजूरी देने के लिए विनियम लागू किए जांएगे।
* राष्‍ट्रीय बीमा कंपनी द्वारा वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए एकमात्र स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना लागू की जाएगी। चिकित्‍सा बीमा खंड में यथा उल्लिखित तीन अन्‍य सरकारी क्षेत्र बीमा कंपनियां भी वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए ऐसी ही कोई योजना लागू करेंगी।
* माता-पिता एवं वरिष्‍ठ नागरिक भरण-पोषण विधेयक, 2007 – यह विधेयक हाल ही में संसद में पेश किया गया है। इसमें माता-पिता के भरण-पोषण, वृद्धाश्रमों की स्‍थापना, चिकित्‍सा सुविधा की व्‍यवस्‍था और वरिष्‍ठ नागरिकों के जीवन और सं‍पत्ति की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है।

वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए इन नई गतिविधियों का प्रयोजन उन्‍हें बेहतर, शान्तिमय और वित्‍तीय दृष्टि से सुदृढ़ जीवन प्रदान करना है।

- भारत का राष्ट्रीय पोर्टल

वृद्धों के लिए राष्ट्रीय नीति


नीतियाँ / योजनाएँ



कुछ वर्षों से सरकार ने वृद्ध व्‍यक्तियों के लिए कई योजनाएं और नीतियां शुरू की हैं। इन योजनाओं और नीतियों का प्रयोजन देश के वरिष्‍ठ नागरिकों की आरोग्‍यता, कल्‍याण और आत्‍म-निर्भरता को बढ़ावा देना है। ऐसे कुछ कार्यक्रमों का उल्‍लेख नीचे किया गया है।

केंद्र सरकार ने भारत में वरिष्‍ठ नागरिकों के आरोग्‍यता और कल्‍याण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1999 में वृद्ध सदस्‍यों के लिए राष्‍ट्रीय नीति तैयार की है। इस नीति का उद्देश्‍य व्‍यक्तियों को स्‍वयं के लिए तथा उनके पति या पत्‍नी के बुढ़ापे के लिए व्‍यवस्‍था करने के लिए प्रोत्‍साहित करना है इसमें परिवारों को अपने परिवार के वृद्ध सदस्‍यों की देखभाल करने के लिए प्रोत्‍साहित करने का भी प्रयास किया जाता है। यह नीति स्‍वैच्छिक एवं गैर-सरकारी संगठनों को परिवार द्वारा की जा रही देखभाल की अनुपूर्ति करने और असुरक्षित वृद्ध व्‍यक्तियों की देखभाल और सुरक्षा की व्‍यवस्‍था करने में मदद करती है। इस नीति के तहत स्‍वास्‍थ्‍य देख-रेख, अनुसंधान जागरूकता लाने और वृद्ध व्‍यक्तियों की देख-रेख करने वालों के लिए प्रशिक्षण सुविधाओं का भी उल्‍लेख किया गया है। इस नीति का मुख्‍य उद्देश्‍य वृद्ध व्‍यक्तियों को पूरी तरह से आत्‍म-निर्भर नागरिक बनाना है।

इस नीति के कारण कई योजनाएं शुरू की गई हैं जैसे कि –

1. प्राथमिक देख-रेख प्रणाली को सुदृढ़ बनाना, जिससे वे वृद्ध व्‍यक्तियों की स्‍वास्‍थ्‍य रक्षा की जरुरतों को पूरा कर सकें।
2. वृद्ध व्‍यक्तियों की स्‍वास्‍थ्‍य रक्षा के संबंध में चिकित्‍सा और सहायक चिकित्‍सा कार्मिकों को प्रशिक्षण तथा परिचय
3. स्‍वस्‍थ रहते हुए बुढ़ापे की ओर बढ़ने की धारणा को बढ़ावा देना
4. वृद्ध-चिकित्‍सा संबंधी सामग्री के उत्‍पादन और विवरण के लिए समितियों को सहायता.
5. अस्‍पतालों में वृद्ध रोगियों के लिए पृथक लाइनों और शैया के आरक्षण की व्‍यवस्‍था
6. अंत्‍योदय योजना के तहत अधिक से अधिक लोगों को शामिल करना और इस बात पर जोर देना कि वृद्ध व्‍यक्तियों, खासकर जो विस्‍थापित हैं, कमजोर वर्गों से संबंध रखते हैं, के कल्‍याण के लिए सस्‍ती दरों पर भोजन की व्‍यवस्‍था करना।

वृद्ध व्‍यक्तियों के लिए समेकित कार्यक्रम एक ऐसी योजना है जिसमें 31 मार्च, 2007 की स्थिति के अनुसार गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को परियोजना लागत की 90 प्रतिशत तक की राशि की वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि वृद्धाश्रम, दिवस देखभाल केंद्र, चलते-फिरते चिकित्‍सा यूनिट स्‍थापित करने और उनकी रखरखाव करने और वृद्ध व्‍यक्तियों की अन्‍य जरुरतों जैसे कि परिवार को प्रबलित और सुदृढ़ बनाना, संबंधित मुद्दों पर जागरूकता लाना और बुढ़ापे को खुशहाल बनाना आदि को पूरा करने के लिए भी कार्य करती है।

सरकार का अन्‍य कार्यक्रम पंचायती राज संस्‍थाओं स्‍वैच्छिक संगठनों और स्‍व-सहायता समूहों की वृद्धाश्रमों और वृद्ध व्‍यक्तियों के लिए बहु सेवा केंद्रों के निर्माण के लिए सहायता प्रदान करने की योजना है। इस योजना में निर्माण के लिए एक बारगी अनुदान प्रदान किया जाता है।

केंद्रीय सरकार स्‍वास्‍थ्‍य योजना केंद्रीय सरकार के कार्यालयों के पेंशनभोगियों को पुरानी बीमारियों के लिए लगातार तीन महीने तक इलाज करने की सुविधा प्रदान करती हैं। अधिक जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें।

राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम में एल्‍जाइमर और अन्‍य विक्षिप्तियों, पार्किन्‍सन रोग, अवसाद और वृद्धावस्‍था मनोविकार रोग से ग्रस्‍त वरिष्‍ठ नागरिकों की जरुरतों पर ध्‍यान दिया जाता है।

नई योजनाएं

जी हां, वित्‍तीय सुरक्षा की यात्रा यहीं समाप्‍त नहीं हो जाती। केंद्र सरकार वरिष्‍ठ नागरिकों के हित के लिए और नई-नई योजनाएं और स्‍कीमें बना रही है। वर्ष 2007-08 के बजट, में वित्‍त मंत्री ने वरिष्‍ठ नागरिकों को मासिक आय प्रदान करने और नई स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजनाएं विकसित करने का प्रस्‍ताव किया है।

वरिष्‍ठ नागरिकों के हित के लिए यह प्रस्‍ताव किया गया है कि –

* राष्‍ट्रीय आवास बैंक एक 'प्रत्‍यावर्ती गिरवी (रिवर्स मार्टगेज) योजना शुरू करेगा जिसके तहत वह वरिष्‍ठ नागरिक जिसके पास अपना मकान है, मकान को गिरवी रखकर मासिक आय प्राप्‍त कर सकता है। वह वरिष्‍ठ नागरिक उस मकान का स्‍वामी बना रहेगा और ऋण का भुगतान अथवा शोधन किए बिना जीवन भर मकान उसके ही कब्‍जे में रहेगा। गिरवी गारंटी कंपनियों के सृजन की मंजूरी देने के लिए विनियम लागू किए जांएगे।
* राष्‍ट्रीय बीमा कंपनी द्वारा वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए एकमात्र स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना लागू की जाएगी। चिकित्‍सा बीमा खंड में यथा उल्लिखित तीन अन्‍य सरकारी क्षेत्र बीमा कंपनियां भी वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए ऐसी ही कोई योजना लागू करेंगी।
* माता-पिता एवं वरिष्‍ठ नागरिक भरण-पोषण विधेयक, 2007 – यह विधेयक हाल ही में संसद में पेश किया गया है। इसमें माता-पिता के भरण-पोषण, वृद्धाश्रमों की स्‍थापना, चिकित्‍सा सुविधा की व्‍यवस्‍था और वरिष्‍ठ नागरिकों के जीवन और सं‍पत्ति की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है।

वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए इन नई गतिविधियों का प्रयोजन उन्‍हें बेहतर, शान्तिमय और वित्‍तीय दृष्टि से सुदृढ़ जीवन प्रदान करना है।

- भारत का राष्ट्रीय पोर्टल


शुक्रवार, 28 नवंबर 2008

रिवॊल्वर रख कर सोए अमिताभ

रिवॊल्वर रख कर सोए अमिताभ



Nov 28, 01:38 pm

नई दिल्ली। मुंबई में हुए आतंकी हमलों से स्तब्ध मेगास्टार अमिताभ बच्चन बृहस्पतिवार रात पहली बार अपने तकिये के नीचे रिवाल्वर रख कर सोए।

बिग बी ने अपने ब्लाग में लिखा है कि जिस तरह आतंकी हमला हुआ उसके बाद बृहस्पतिवार रात मैंने पहली बार ऐसा किया। मुझे उम्मीद है कि दोबारा ऐसा करने की नौबत नहीं आएगी। बृहस्पतिवार रात सोने से पहले मैंने अपनी लाइसेंसशुदा ़32 रिवाल्वर निकाली उसे भरा और अपने तकिये के नीचे रख दिया।

हमलों से व्यथित अमिताभ को बृहस्पतिवार रात नींद भी बहुत मुश्किल से आई। बुधवार को आतंकियों ने मुंबई में कई स्थानों पर हमले किए। बृहस्पतिवार को अमिताभ के पिता और प्रख्यात कवि दिवंगत हरिवंशराय बच्चन का जन्मदिन था। अमिताभ पूरे दिन घर पर रहे और टीवी पर देखते रहे कि सुरक्षा बल आतंकियों को पकड़ने के लिए किस तरह जूझ रहे थे। गौरतलब है कि करीब दो माह पहले दिल्ली में जब बम विस्फोट हुए थे, उस समय अमिताभ के पुत्र अभिषेक अपनी फिल्म द्रोण के प्रमोशन के लिए दिल्ली आए हुए थे। वह कनॉटप्लेस की ओर जा ही रहे थे कि तीव्र धमाका सुनाई दिया। ट्रैफिक जाम में फंसे अभिषेक ने अपने कार चालक से लौटने के लिए कहा। बाद में उन्हें पता चला कि धमाका बम विस्फोट के कारण हुआ था।

कभी रुपहले पर्दे पर अव्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले अमिताभ को एंग्री यंग मैन कहा जाता था। आज इस एंग्री ओल्ड मैन के दिल में उस असमर्थता को लेकर गहरी नाराजगी है, जिसके कारण देश की सुरक्षा खतरे में आ जाती है। ब्लाग में बिग बी ने लिखा है कि मेरी पीड़ा उन बेकसूर और पूरी तरह असुरक्षित देशवासियों को लेकर है जो आतंकी हमलों का सामना कर रहे हैं। मेरा गुस्सा उन अधिकारियों की असमर्थता को लेकर है जिन पर हम सबकी सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

आतंकवाद से निपटने की सुरक्षाबलों की कोशिशों की सराहना करते हुए अमिताभ ने लिखा है कि जांबाज अधिकारियों और वीर पुलिसकर्मियों ने हमारे लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। मैं उन्हें केवल सैल्यूट कर सकता हूं और कर्तव्यपालन में उनकी ईमानदारी का सम्मान कर सकता हूं।

बहरहाल, अमिताभ ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की है कि बार-बार मुंबई के जज्बे की बात क्यों की जाती है। उन्होंने लिखा है कि त्रासद अनुभवों को छिपाने के लिए इन शब्दों को उछाला जाता है, जबकि हाल के वर्षो में कई शहर इन अनुभवों से दो चार हुए हैं।

मुंबई को दिलवालों की नगरी बताते हुए अमिताभ ने लिखा है ..हां, मुंबई मजबूत है और उसमें बर्दाश्त करने की अपूर्व क्षमता है। ऐसी घटनाओं के आगे उसे झुकना नहीं चाहिए, लेकिन हमें बचाव के लिए बार-बार किसी आवरण का सहारा नहीं लेना चाहिए। इसे हटाइए और सर उठा कर आगे बढ़ जाइए।

टीवी चैनलों ने बिग बी से मुंबई हमलों पर बयान देने के लिए बार-बार अनुरोध किया लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने ब्लाग में लिखा है कि बयानबाजी के लिए कहने के बजाय, मुझे आदेश दीजिए कि हमें हर भारतीय को जगाने और घटना स्थलों की ओर ले जाने की जरूरत है। मैं पहला व्यक्ति होउंगा जो ऐसा करेगा। लेकिन॥ कृपया मुझे बयानबाजी करने के लिए न कहें। इससे दर्शकों के हितों की पूर्ति नहीं होगी।


"जागरण"

गुरुवार, 23 अक्टूबर 2008

वार्षिक अधिवेशन ऑनलाइन





हिन्दी भारत
समूह को आरम्भ हुए आज २३ अक्तूब को पूरा एक वर्ष हो गया इसके इस कार्यकाल को समूह के साथियों की उपस्थिति ने अत्यन्त जीवन्त प्राणवान् बनाए रखा है।

मैं एक वर्ष के अतीत में आज देखती हूँ तो वे कुछ दिन स्मरण हो आते हैं जब इसके गठन के लिए मूल चिन्ताओं से व्यग्र हो यह प्रयास आरम्भ किया था। भविष्य में देखती हूँ तो आने वाले समय के लिए बहुत -सी सुखद कल्पनाओं से भर जाती हूँ। किसी भी संस्था अथवा संगठन का अस्तित्व उसके बने रहने मात्र में नहीं निहित होता अपितु प्रकारान्तर में उसके मन्तव्यों के सफलीभूत होने में निहित रहता है। जैसे जैसे सामूहिक चिन्ताओं पर सामूहिक सम्वाद की स्थितियाँ बनती हैं तैसे तैसे उनके निराकरण की दिशाएँ मार्ग भी प्रशस्त होने की सम्भावनाएँ प्रबल होती चली जाती हैं। यों होना तो उस से अधिक चाहिए, अपेक्षित भी होता है किन्तु यही क्या कम हर्ष का विषय है कि किसी मुद्दे को लेकर कम से कम देश दुनिया में रहने वाले कुछ मुट्ठीभर लोग तो एकत्र हुए! बस, इसी सामूहिकता के बूते बड़ी बड़ी सुलझनें भी पा ही ली जा सकती हैं; आशा बल देती है.

अस्तु!
इस प्रथम वर्षगाँठ को वार्षिक अधिवेशन के रूप में २५ अक्टूबर, शनिवार को नेट पर एक सामूहिक चर्चा के माध्यम से सम्पन्न करने का विचार बन रहा है। यदि आप में से कोई नया विचार सु्झाएँ तो उसका भी स्वागत है। इसे भारतीय समय से रात्रि बजे व यूके (लंदन समय) .३० बजे दोपहर को आरम्भ करने की योजना है ; लगभग दो घंटे का कार्यक्रम रहेगा । इसे याहू के मैसेंजर के माध्यम से चित्र व ध्वनि-कॊन्फ़्रेन्सिंग के रूप में सम्पन्न किया जाएगा । जिसमें एक हेडफ़ोन ( माईक सहित) की आवश्यकता होगी। परिचर्चा को सम्बोधित करने के लिए ३-४ वक्ताओं की अभी योजना है, जो १५1 मिनट हमें सम्बोधित करेंगे। शेष एक घंटा हम परस्पर सम्वाद का सुख लेंगे। (- यह अभी तक ऐसी इच्छा है।) आप सभी किसी भी प्रकार का सुझाव देना चाहें तो स्वागत है। तुरत प्रतिक्रियाओं की अपेक्षा है। नेट पर भाषा, संस्कृति, सामाजिक प्रश्न साहित्य आदि में रुचि रखने वालों से निवेदन है कि अपनी उपस्थिति से इसे सफल सार्थक बनाएँ | इस खुले मंच पर सभी का स्वागत कर हर्ष होगा |

इसके तकनीकी पक्ष के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें -
विस्तृत जानकारी


सामूहिक चर्चा में भाग लेने के लिये :
  1. आप को याहू id और याहू मेसेन्जर सौफ़्ट्वेयर की ज़रूरत होगी । यदि आप के पास याहू id नहीं है तो एक नया id बनायें । याहू मेसेन्ज़र सौफ़्ट्वेयर यहाँ उपलब्ध है , download करें और स्थापित करें http://messenger.yahoo.com/
  2. याहू मेसेन्ज़र पर logon करें (याहू id का प्रयोग करते हुए).
  3. याहू मेसेन्ज़र में Contacts और फ़िर Add a Contact पर click करें | email address की जगह bharathindi@yahoo.co.uk टाइप करें और next पर Click करें । एक बार फ़िर next पर Click करें और फ़िर finish पर ।
  4. निर्धारित समय (भारतीय समय रात बजे, न्यूयार्क समय सुबह ११:३० बजे लन्दन समय दोपहर .३० बजे) याहू मेसेन्ज़र पर logon करें । आप को एक Conference Call में शामिल होने का निमंत्रण मिलेगा , उसे स्वीकार करें ।
  5. Chat Window में आवाज के लिये Call और यदि आप के पास web camera है तो webcam पर Click करें ।
  6. आप को आवाज़ सुनने के लिये speakers और बोलने के लिये Microphone की ज़रूरत होगी । यदि आप के पास headphone है तो वह speaker और Microphone दोनों का काम कर सकते हैं। यदि आप के पास web camera है तो और लोग आप को देख सकेंगें ।
  7. पूर्व में इस तरह के प्रयोग में देखा गया था कि यदि आप के पास Vista Operating Systsem है तो आप को शायद Conference call में न जोड़ा जा सके ।
  8. वार्ता शनिवार को करना तय हुआ है । इस की तैयारी के लिये शुक्रवार को ठीक उसी समय एक प्रयोग किया जा सकता है ।
  9. यदि आप के पास कोई प्रश्न हो तो इस ब्लॉग पर टिप्पणी के रूप में लिखें। यदि अपना ईमेल यहाँ न देना चाहें तो आपको उत्तर भी यहीं प्राप्त होगा ।
  10. जो इस कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं, वे Yahoo Messenger पर जा कर bharathindi@yahoo.co.uk को अपने Contacts में जोड़े या bharathindi@yahoo.co.uk पर एक पत्र भेजें ।

- आप सभी की उपस्थिति प्रार्थित है |
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